बिजनौर के इस गांव ने सरकार के लाखों रुपए ठुकराकर ऐसा काम कर दिया, पीएम मोदी भी खुश हो जाएंगे

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उत्तर प्रदेश का जिला बिजनौर. जहां से अक्सर परेशान करने वाली ख़बरें आती हैं. कभी दंगा तो कभी छेड़छाड़. खैर ये खबर खुश करने वाली है. अगर इस खबर को प्रधानमंत्री मोदी पढ़ लें तो वो भी बेहद खुश होंगे. क्योंकि साफ सफाई को लेकर वो लगातार प्रयास कर रहे हैं.

‘मुझे खुशी है कि स्वच्छ भारत अभियान एक जन आंदोलन बन गया है और 100 से ज्यादा जिले अब खुले में शौच से मुक्त हो गए हैं.’
– पीएम मोदी (उन्होंने ये ट्वीट मार्च में किया था)

बिजनौर जिले का गांव है मुबारकपुर कलां. हल्दौर ब्लॉक के अंदर आता है. इस गांव में 661 फैमिली रहती हैं. गांव की आबादी 3500 से ज्यादा है. मुस्लिम बहुल इस गांव में सिर्फ और सिर्फ 146 घरों में टॉयलेट बने थे, बाकी के परिवार खुले में ही शौच करने जाते थे. इस गांव को ‘खुले में शौच से मुक्ति’ के लिए सरकार से 17.5 लाख रुपये मिले थे. मगर गांव के लोगों ने लेने से इंकार कर दिया. और बाकी लोगों के लिए मिसाल पेश कर दी.

टाइम्स ऑफ़ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक गांववालों का कहना था,

‘यह रमजान का महीना है और अच्छे कामों के लिए मदद ली नहीं, दी जाती है. घरों में शौचालय बनाना अच्छा काम है और यह काम हम खुद करेंगे.’

गांव में टॉयलेट बनवाने के लिए जिला प्रशासन ने गांव की प्रधान किश्वर जहां को मदद करने को कहा.

गांव में कितने घरों में टॉयलेट नहीं है, इसका खाका प्रधान किश्वर जहां ने तैयार कराया और टॉयलेट बनवाने का प्रपोजल प्रशासन को भेज दिया. चीफ डेवलपमेंट अफसर इंद्रमणि त्रिपाठी और जिला पंचायत राज अफसर मनीष कुमार ने 17.5 लाख रुपए टॉयलेट बनवाने के लिए रिलीज़ करा दिए. पैसा प्रधान के जॉइंट बैंक अकाउंट में आ भी गया. लेकिन प्रशासन को झटका तब लगा, जब गांववालों ने वो पैसा लेने से ही इंकार कर दिया. गांववालों ने रमजान का हवाला देते हुए खुद ही मिलकर अपने पैसों से टॉयलेट बनवाने का फैसला किया. उनका कहना है कि रमजान के महीने में मदद की जाती है. ली नहीं जाती. और फिर गांव वालों ने पैसा इकट्ठा करके हर घर में टॉयलेट बनवा दिया. और इस तरह ये गांव खुले में शौच से मुक्त हो गया.

गांववालों के इस फैसले पर चीफ डेवलपमेंट अफसर इंद्रमणि त्रिपाठी का कहना है, ‘राज्य का ये पहला गांव होगा, जहां के लोगों ने पैसा लेने से मना कर दिया और खुद ही टॉयलेट बनवाए हैं. ये ख़ुशी की बात है. मुबारकपुर कलां के लोगों ने सभी के लिए मिसाल पेश की है.’

गांव की प्रधान किश्वर जहां का कहना है कि ये हमारा फ़र्ज़ है कि जो टॉयलेट नहीं बनवा सकते थे उनकी हम सब मिलकर मदद करे. गांव के लोग अपने पैसे से ही ये काम करना चाहते थे. और ऐसा नहीं है कि लोगों ने सिर्फ पैसे से मदद की हो, बल्कि मजदूरी करके भी लोगों ने टॉयलेट बनवाने में मदद की है.

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