किसानों को एक रुपया मुआवज़ा मिलने का सच ये है

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महाराष्ट्र में सड़कों पर दूध बहाने से शुरू हुआ आंदोलन जब मध्यप्रदेश पहुंचा तो खून बहने लगा. मांग एक ही थी – कर्ज़ माफी. देवेंद्र फडनवीस मीटिंग पर मीटिंग ले रहे हैं और मध्यप्रदेश के मामा शिवराज को उपवास पर बैठने के अलावा कुछ सूझ नहीं रहा. तो बाकी राज्यों में भी संतरी से लेकर मंत्री चौकन्ने बैठे हैं कि अपने यहां बवाल न हो जाए.

इसी सब के बीच 9 जून को कर्नाटक के कुछ ज़िलों में हड़कंप मच गया कि किसानों को खराब हुई फसल के मुआवज़े के तौर पर एक रुपया मिल रहा है. माने सौ नए पैसे. मुआवज़ा जमा करने वाले का नाम था नेशनल पेमेंट्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया.

धारवाड़, हुबली, बीजापुर और बागलकोट के किसान ये सोच कर घबरा गए कि सरकार उनकी बरबादी का मोल एक रुपया लगा रही है. और सरकार ये सोच कर घबरा गई कि किसान बिगड़ गए तो क्या होगा. तुरंत मामला दिखवाया गया तो बात कुछ यूं निकली –

इस बार मुआवज़ा सीधे किसानों के खातों में जमा किया जा रहा है. इसके लिए बैंक खाते को आधार नंबर से लिंक करना था. आधार से लिंक होने के बाद नेशनल पेमेंट्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया बतौर टेस्टिंग किसानों के खातों में एक-एक रुपया जमा कर के देखता है. लेकिन किसानों ने उसे ही मुआवज़ा समझ लिया और घबरा गए.

किसानों की घबराहट आसानी से समझी जा सकती है. क्योंकि सरकारें इस से पहले कई बार ऐसी बदमाशी कर चुकी हैं कि फसल बरबाद होने पर मुआवज़े के लिए पूरा कागज-पत्तर तैयार करवा लिया और चेक दिया 10 रुपए का. जिसे बाबू से छुड़ाने में 100 रुपए लग जाएं. खैर, इस मामले में ऐसा नहीं था. इंडियन एक्सप्रेस में छपे धारवाड़ के डिप्टी कमिश्नर के मुताबिक इन सब किसानों को एक हफ्ते के अंदर मुआवज़ा मिल जाएगा.

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