कश्मीर में धारा 370 पर बड़ा फैसला, अलगाववादियों और पत्थरबाजों में मचा हडकंप ..

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आजादी के बाद से कश्मीर समस्या भारत को घेरे हुए हैं. एक ओर पाकिस्तान ने कश्मीर को अपने अस्तित्व का सवाल बना लिया है और आतंकियों व् पैसे के दम पर कश्मीर में अस्थिरता व् अलगाववाद फैलाने में जुटा हुआ है, वहीँ भारतीय जनता के टैक्स के अरबों रुपये घाटी में खर्च करने के बावजूद भारत में कश्मीर समस्या सुरसा की तरह मुँह फाड़े खड़ी हुई है. मगर अब इसके ख़त्म होने की एक उम्मीद जगी है.
कश्मीर से हटेगी धारा-370

मोदी सरकार के बदले हुए तेवरों से स्पष्ट है कि अब कश्मीर का बेड़ा पार लगने ही वाला है. जम्मू-कश्मीर से धारा 370 हटाने के सवाल पर भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने अहम बयान दिया है. उन्होंने कहा है कि अन्य दलों को भरोसे में लेकर बीजेपी धारा 370 पर जरूर बात करेगी. हालांकि उनका मानना है कि केवल धारा 370 खत्म करने से ही कश्मीर समस्या नहीं सुलझने वाली.

बता दें कि घाटी के अलगाववादियों पर कार्रवाई शुरू हो गयी है. एनआईए ने अलगाववादी नेताओं को दिल्ली बुलाकर पूछताछ शुरू कर दी है और पूछताछ में ये बात खुलकर सामने आयी है कि अलगाववादियों को कश्मीर में अलगाववाद फैलाने व् हिंसा करवाने के लिए पाकिस्तान से पैसे मिलते हैं.
कांग्रेस है कश्मीर समस्या के लिए जिम्मेदार !

वहीँ सेना को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि वो हिज्बुल मुजाहिद्दीन का कश्मीर से पूरी तरह से सफाया कर दे. जिसके चलते सेना ने पिछले कुछ ही दिनों में बुरहान के लगभग पूरे के पूरे गैंग का ही सफाया कर दिया है और साथ ही हिज्बुल के लीडर सबजार को भी ठोक दिया है. कश्मीरी पंडितों की घर वापसी कब होगी, इस सवाल पर अमित शाह ने बताया कि प्रक्रिया शुरू हो गई है. कश्मीर में कालोनियां बनाईं जा रहीं हैं. मोदी सरकार बेघर हुए कश्मीरी पंडितों की घर वापसी कराकर ही दम लेगी.

कश्मीर समस्या के लिए कांग्रेस को जिम्मेदार ठहराते हुए शाह ने कहा कि कश्मीर समस्या कुल मिलाकर घाटी के ढ़ाई जिलों की है. गौरतलब है कि कश्मीर में लागू धारा 370 ही है, जिसकी वजह से कश्मीर घाटी के अलगाववादियों ने पत्थरों द्वारा भारत को झुकाने की गलतफहमी पाली हुई है. धारा 370 को हटा कर घाटी को यदि शेष भारत से जोड़ दिया जाए और बिहार, ओडिसा, यूपी के लोगों की आवाजाही शुरू हो जाए तो ऐसे ढाई जिलों का मतलब अपने आप खत्म होगा.
सेना प्रमुख की साफ़-साफ़ चेतावनी !

वहीँ सेना प्रमुख जनरल रावत ने भी कश्मीर मसले पर बेहद सख्त रुख धारण किया हुआ है. जनरल रावत ने कहा है कि किसी भी देश के लोगों में सेना का भय खत्म होने पर देश का विनाश हो जाता है. विरोधियों को आपसे डरना चाहिए और आपके लोगों में भी आपका भय होना चाहिए. हमारी सेना मित्रतापूर्ण व्यवहार रखने वाली है लेकिन कानून-व्यवस्था बहाल करने से जुड़ा मामला आने पर लोगों में हमारा भय होना चाहिए.
‘कश्मीर में जिस तरह का छद्म युद्ध चल रहा है, वो बेहद गंदे तरीके से लड़ा जाता है. इसमें जीत हासिल करने के लिए सेना को नए तरीके आजमाने होंगे. वो लोग हम पर पत्थर फेंक रहे हैं, पेट्रोल बम फेंक रहे हैं. ऐसे में जब मेरे जवान मुझसे पूछते हैं कि हम क्या करें, तो क्या मुझे उनसे ये कहना चाहिए कि आप बस इंतजार करिए और जान दे दीजिए? मैं राष्ट्रीय ध्वज के साथ एक अच्छा ताबूत लेकर आऊंगा और सम्मान के साथ आपके शव को आपके घर भेजूंगा. सेना प्रमुख के तौर पर क्या मुझे उनसे ऐसा कहना चाहिए? मुझे वहां तैनात सैनिकों को मनोबल बनाए रखना है.’
बहरहाल सेना व् सरकार के सख्त इरादों से ये बात स्पष्ट है कि सरकार कश्मीर को लेकर अपना मन बना चुकी है और अब पीछे नहीं हटने वाली, यही वजह है कि रक्षामंत्री अरुण जेटली, गृहमंत्री राजनाथ सिंह से लेकर बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह तक एक ही सुर में बोल रहे हैं. सेना को जिस तरह से आतंकियों के सफाये के आदेश दिए गए हैं और जांच एजेंसियों को अलगाववादियों के पीछे लगा दिया गया है, उससे भी सरकार के इरादे साफ़ जाहिर होने लगे हैं.

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